पर्याप्त नहीं है
पर्याप्त नहीं है न्यायप्रिय होना क्योंकि अन्याय बहुतों को प्रिय है और वे अन्याय…
पर्याप्त नहीं है न्यायप्रिय होना क्योंकि अन्याय बहुतों को प्रिय है और वे अन्याय…
कठिन है क्या दूसरों को वो रास्ता दिखाना जिस पर कभी हम चले ही न हों क्य…
सबसे पहले जागें हम Sabse pehle jaagein ham भारी, बेहद भारी पड़…
तृप्ति की आकांक्षा है किन्तु न संकल्प निर्बल हूँ प्रतीक्षारत नि…
अचरज आँखों में नींद नहीं बेचैन हुआ मन मेरा है निद्रा में देखो लीन सभी स…
अचरज में हूँ कि आज मुझे यूँ छोड़ तुम्हें क्यों जाना है जो साथ तुम्हारे बीता है…